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अपने सूट की देखभाल कैसे करें — ताकि बेहतरीन कपड़ा सालों चले

अपने सूट की देखभाल कैसे करें — ताकि बेहतरीन कपड़ा सालों चले

हर कुछ हफ़्तों में कोई सज्जन हमारी चांदनी चौक की दुकान पर अपना पसंदीदा सूट लेकर आते हैं और एक चिंता, जो वे कहते नहीं: मैंने इसे दो बार पहना है, अब यह थका-थका लग रहा है, और मुझे नहीं पता कि कहीं मैं इसे ख़राब तो नहीं कर रहा। दिल्ली के परिवारों को चार दशकों से कपड़े पहनाने के बाद हमारा जवाब हमेशा एक ही रहता है — अच्छा सूट ज़्यादा नहीं माँगता, बस कुछ सही छोटी आदतें माँगता है। कपड़े का ध्यान रखिए, और वह दिल्ली की गर्मी, धूल और मानसून — तीनों में सालों तक अपना आकार और रंग बनाए रखेगा।

हर बार पहनने के बाद हवा लगाएँ और ब्रश करें

सबसे उपयोगी आदत की कोई क़ीमत नहीं। सूट उतारने के बाद उसे टाँग दें और अलमारी में वापस रखने से पहले कुछ घंटे हवा लगने दें — दिन भर पहनने से ऊन में नमी और शरीर की गर्मी बैठ जाती है, और हवा लगने पर वह निकल जाती है और सिलवटें अपने आप बैठ जाती हैं। हफ़्ते में एक बार नरम ब्रश से, हमेशा नीचे की ओर, हल्के से ब्रश करें ताकि दिल्ली की धूल हट जाए। बस इतनी-सी आदत से ही ड्राई-क्लीन की ज़रूरत बहुत कम पड़ती है।

ड्राई-क्लीन अपनी सोच से कहीं कम कराएँ

यह सुनकर लोग चौंकते हैं: ज़्यादा ड्राई-क्लीन कराना, पहनने से भी ज़्यादा तेज़ी से सूट को पुराना करता है। ड्राई-क्लीन के केमिकल और प्रेस की गर्मी ऊन के रेशों पर सख़्त होते हैं और धीरे-धीरे कपड़े की क़ुदरती जान निकाल देते हैं। रोज़ के इस्तेमाल वाले सूट के लिए एक मौसम में दो बार काफ़ी है; कम पहने सूट को तो पूरे मौसम सिर्फ़ हवा और दाग़ साफ़ करने से ही चलाया जा सकता है। छोटे दाग़ पर — रगड़ें नहीं — बस साफ़, हल्के गीले कपड़े से थपथपाएँ और अपने आप सूखने दें। जब ड्राई-क्लीन कराएँ, तो हल्की सफ़ाई और हाथ से प्रेस करने को कहें।

पहनने के बीच आराम दें — और सही तरीक़े से टाँगें

लगातार दो दिन पहना गया सूट अपना आकार वापस पाने का समय नहीं पाता। हो सके तो दो बार पहनने के बीच एक दिन का आराम दें और एक ही सूट पर निर्भर रहने के बजाय दो-तीन सूट बदल-बदल कर पहनें। इसे चौड़े, घुमावदार लकड़ी के हैंगर पर टाँगें जो कंधों को सहारा दे — पतले तार के हैंगर कंधे की लाइन बिगाड़ देते हैं। पतलून को मोहरी से या पट्टी पर सीधा मोड़कर टाँगें ताकि क्रीज़ सही रहे। जेबें हमेशा ख़ाली रखें; भरी जेब जैकेट का आकार खींच देती है।

दिल्ली के मौसम में रखरखाव

दिल्ली कपड़े पर सख़्त है — सूखी गर्मी और धूल, और फिर मानसून की नमी। सूट को सूती या कपड़े के साँस लेने वाले कवर में रखें, प्लास्टिक में कभी नहीं: प्लास्टिक नमी क़ैद कर लेता है और ऊन पर दाग़ या फफूँदी ला सकता है, ख़ासकर उमस वाले महीनों में। अलमारी में कुछ नीम के पत्ते या सीडर (देवदार) की लकड़ी रखें — यह पतंगों (कीड़ों) से क़ुदरती बचाव है, जो ऊन की ओर खिंचते हैं। मानसून के दौरान जो ऊनी कपड़े आप नहीं पहन रहे, उन्हें हर कुछ हफ़्तों में देख लें। अलमारी को बीच-बीच में हवा और रौशनी दें; बंद, सीलन भरी अलमारी सूट की सबसे बड़ी दुश्मन है।

सिलवटें: भाप दें, जलाएँ नहीं

रोज़मर्रा की सिलवटों के लिए गरम इस्तरी से बेहतर है भाप। भाप भरे बाथरूम में कुछ मिनट, या गारमेंट स्टीमर का हल्का इस्तेमाल, ज़्यादातर सिलवटें रेशों पर ज़ोर डाले बिना ठीक कर देता है। अगर इस्तरी करनी ही पड़े, तो कम आँच और एक प्रेस-कपड़ा — इस्तरी और सूट के बीच पतला सूती कपड़ा — इस्तेमाल करें ताकि इस्तरी सीधे ऊन पर न लगे। सीधी गर्मी कपड़े पर चमक छोड़ देती है जो फिर नहीं जाती।

छोटी मरम्मत, बढ़ने से पहले

ढीला बटन, वेंट पर निकलता धागा, खुलने लगती सिलाई — शुरू में यह पाँच मिनट का काम है, बाद में महँगा। जैसे ही नज़र आए, ठीक करा लें, और साल में एक बार अपने दर्ज़ी से सूट देखने को कहें। अच्छे कपड़े में बना अच्छा सूट सालों संभालकर पहनने के लिए बनता है, हर मौसम बदलने के लिए नहीं।

अच्छा कपड़ा अच्छी देखभाल का बदला देता है — चांदनी चौक में हमारे चार दशकों में यह हमेशा सच रहा है। अगर आप सूट का कपड़ा चुन रहे हैं और ईमानदार सलाह चाहते हैं, या अपना सूट अपनी नाप का सिलवाना चाहते हैं, तो हमारे पास आइए या WhatsApp पर संदेश भेजिए। और अगर आप अब भी ऊन और ब्लेंड के बीच तय कर रहे हैं, तो हमारी ऊन बनाम पॉली-वूल गाइड और फ़ैब्रिक सवाल-जवाब मदद करेंगे।

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